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mahabharat 10.8.46: जो क्षत्रिय शत्रुघ्न थे और अश्वत्थामा का वह रूप देखकर उसे राक्षस समझकर अपनी आँखें बंद कर लेते थे ॥46॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  10.8.46 
तद् रूपं तस्य ते दृष्ट्वा क्षत्रिया: शत्रुकर्षिण:।
राक्षसं मन्यमानास्तं नयनानि न्यमीलयन्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
जो क्षत्रिय शत्रुघ्न थे और अश्वत्थामा का वह रूप देखकर उसे राक्षस समझकर अपनी आँखें बंद कर लेते थे ॥46॥
 
Those Kshatriyas, who were Shatrughan and seeing that form of Ashwatthama, would close their eyes considering him to be a demon. ॥46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)