श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  10.8.44 
तस्य लोहितरक्तस्य दीप्तखड्गस्य युध्यत:।
अमानुष इवाकारो बभौ परमभीषण:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
वह रक्त से लथपथ था। युद्ध करते समय योद्धा की तलवार चमक रही थी। उस समय उसका रूप अत्यंत भयानक लग रहा था, मानो किसी मनुष्येतर प्राणी का हो। 44.
 
He was soaked in blood. The warrior's sword was shining as he fought. At that time his form appeared extremely terrifying, like that of a non-human creature. 44.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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