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श्लोक 10.8.44  |
तस्य लोहितरक्तस्य दीप्तखड्गस्य युध्यत:।
अमानुष इवाकारो बभौ परमभीषण:॥ ४४॥ |
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| अनुवाद |
| वह रक्त से लथपथ था। युद्ध करते समय योद्धा की तलवार चमक रही थी। उस समय उसका रूप अत्यंत भयानक लग रहा था, मानो किसी मनुष्येतर प्राणी का हो। 44. |
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| He was soaked in blood. The warrior's sword was shining as he fought. At that time his form appeared extremely terrifying, like that of a non-human creature. 44. |
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