श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  10.8.43 
विस्फुरद्भिश्च तैर्द्रोणिर्निस्त्रिंशस्योद्यमेन च।
आक्षेपणेन चैवासेस्त्रिधा रक्तोक्षितोऽभवत्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
मारे जानेवाले योद्धाओं के हाथ-पैर हिलाना, उन्हें मारनेके लिए तलवार उठाना और उससे सब ओर से उन पर आक्रमण करना - इन तीन कारणोंसे द्रोणपुत्र अश्वत्थामा रक्तसे नहा गया ॥ 43॥
 
Moving the hands and legs of the warriors to be killed, raising the sword to kill them and attacking them from all sides with it - due to these three reasons, Drona's son Ashwatthama was bathed in blood. ॥ 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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