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mahabharat 10.8.26-28h: राजन! इस प्रकार धृष्टद्युम्न को यमलोक भेजकर महाबली अश्वत्थामा अपने शिविर से निकलकर अपने सुन्दर रथ के पास आकर उस पर सवार हो गया। इसके बाद वह पराक्रमी योद्धा अन्य शत्रुओं का संहार करने की इच्छा से अपनी गर्जना से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजाता हुआ अपने रथ से प्रत्येक शिविर पर आक्रमण करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 26-28h
 
 
श्लोक  10.8.26-28h 
तं तु तेनाभ्युपायेन गमयित्वा यमक्षयम्॥ २६॥
अध्यतिष्ठत तेजस्वी रथं प्राप्य सुदर्शनम्।
स तस्य भवनाद् राजन् निष्क्रम्यानादयन् दिश:॥ २७॥
रथेन शिबिरं प्रायाज्जिघांसुर्द्विषतो बली।
 
 
अनुवाद
राजन! इस प्रकार धृष्टद्युम्न को यमलोक भेजकर महाबली अश्वत्थामा अपने शिविर से निकलकर अपने सुन्दर रथ के पास आकर उस पर सवार हो गया। इसके बाद वह पराक्रमी योद्धा अन्य शत्रुओं का संहार करने की इच्छा से अपनी गर्जना से सम्पूर्ण दिशाओं को गुंजाता हुआ अपने रथ से प्रत्येक शिविर पर आक्रमण करने लगा।
 
King! By this method, after sending Dhrishtadyumna to Yamaloka, the illustrious Ashwatthama came out of his camp and came near his beautiful looking chariot and rode on it. After this, that powerful warrior, with the desire to kill other enemies, started attacking each camp with his chariot, echoing all directions with his roar. 26-27 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)