Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.8.22-23h: उसकी वह अस्पष्ट वाणी सुनकर द्रोणपुत्र ने कहा - 'हे कुलकलंक! अपने आचार्य को मारने वालों के लिए कोई पवित्र लोक नहीं है; अतः दुर्मते! तुम शस्त्र से मारे जाने योग्य नहीं हो ॥22 1/2॥ | mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तस्याव्यक्तां तु तां वाचं संश्रुत्य द्रौणिरब्रवीत्।
आचार्यघातिनां लोका न सन्ति कुलपांसन॥ २२॥
तस्माच्छस्त्रेण निधनं न त्वमर्हसि दुर्मते।
अनुवाद
उसकी वह अस्पष्ट वाणी सुनकर द्रोणपुत्र ने कहा - 'हे कुलकलंक! अपने आचार्य को मारने वालों के लिए कोई पवित्र लोक नहीं है; अतः दुर्मते! तुम शस्त्र से मारे जाने योग्य नहीं हो ॥22 1/2॥
Hearing that vague speech of his, Drona's son said - 'O Kulakalank! There is no sacred world for those who kill their Acharya; So Durmate! You are not worthy of being killed by a weapon. 22 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥