Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.8.19-20: उसने द्रोणपुत्र को अपने नखों से खरोंचकर अस्पष्ट वाणी में कहा - 'हे गुरुपुत्र, हे पुरुषों में श्रेष्ठ! अब विलम्ब न करो। किसी शस्त्र से मुझे मार डालो, जिससे तुम्हारे कारण मैं पुण्य लोकों में जा सकूँ।'॥19-20॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  10.8.19-20 
तुदन्नखैस्तु स द्रौणिं नातिव्यक्तमुदाहरत्॥ १९॥
आचार्यपुत्र शस्त्रेण जहि मां मा चिरं कृथा:।
त्वत्कृते सुकृताँल्लोकान् गच्छेयं द्विपदां वर॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उसने द्रोणपुत्र को अपने नखों से खरोंचकर अस्पष्ट वाणी में कहा - 'हे गुरुपुत्र, हे पुरुषों में श्रेष्ठ! अब विलम्ब न करो। किसी शस्त्र से मुझे मार डालो, जिससे तुम्हारे कारण मैं पुण्य लोकों में जा सकूँ।'॥19-20॥
 
He scratched Drona's son with his nails and said in an unclear voice, 'O son of the teacher, the best among men! Do not delay now. Kill me with some weapon, so that because of you I can go to the virtuous worlds.'॥ 19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)