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mahabharat 10.8.157-158h: तत्पश्चात् उन दोनों का अभिवादन स्वीकार करके द्रोणपुत्र ने उन्हें गले लगाया और बड़े हर्ष के साथ यह महत्त्वपूर्ण एवं उत्तम वचन कहा -॥157 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 157-158h
 
 
श्लोक  10.8.157-158h 
पर्यष्वजत् ततो द्रौणिस्ताभ्यां सम्प्रतिनन्दित:॥ १५७॥
इदं हर्षात् तु सुमहदाददे वाक्यमुत्तमम्।
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् उन दोनों का अभिवादन स्वीकार करके द्रोणपुत्र ने उन्हें गले लगाया और बड़े हर्ष के साथ यह महत्त्वपूर्ण एवं उत्तम वचन कहा -॥157 1/2॥
 
Thereafter, accepting the greetings of both of them, Drona's son hugged them and with great joy uttered this important and excellent word -॥ 157 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)