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mahabharat 10.8.156-157h: उस समय जब वे तीनों महारथी पाण्डवों का महान संहार करके एक दूसरे से मिले, तब उन्होंने एक दूसरे से कहा, 'यह कार्य बड़े भाग्य से सम्पन्न हुआ है।'   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 156-157h
 
 
श्लोक  10.8.156-157h 
ततो जनक्षयं कृत्वा पाण्डवानां महात्ययम्॥ १५६॥
दिष्टॺा दिष्टॺैव चान्योन्यं समेत्योचुर्महारथा:।
 
 
अनुवाद
उस समय जब वे तीनों महारथी पाण्डवों का महान संहार करके एक दूसरे से मिले, तब उन्होंने एक दूसरे से कहा, 'यह कार्य बड़े भाग्य से सम्पन्न हुआ है।'
 
At that time, when those three great carnatic warriors met each other, after having caused a great destruction to the Pandavas, they said to each other, 'This task has been accomplished by great fortune.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)