श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 154-155h
 
 
श्लोक  10.8.154-155h 
संजय उवाच
तेषां नूनं भयान्नासौ कृतवान् कुरुनन्दन।
असांनिध्याद्धि पार्थानां केशवस्य च धीमत:॥ १५४॥
सात्यकेश्चापि कर्मेदं द्रोणपुत्रेण साधितम्।
 
 
अनुवाद
संजय ने कहा- कुरुनन्दन! अश्वत्थामा पाण्डवों, श्रीकृष्ण और सात्यकि से सदैव भयभीत रहता था; इसीलिए उसने पहले ऐसा नहीं किया था। इस समय कुन्तीपुत्र बुद्धिमान श्रीकृष्ण और सात्यकि के चले जाने से अश्वत्थामा ने अपना कार्य सिद्ध कर लिया। 154 1/2॥
 
Sanjay said- Kurunandan! Ashwatthama was always afraid of Pandavas, Shri Krishna and Satya; That's why he didn't do it earlier. At this time, due to the departure of Kunti's son, intelligent Shri Krishna and Satyaki, Ashwatthama accomplished his task. 154 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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