श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 152
 
 
श्लोक  10.8.152 
धृतराष्ट्र उवाच
प्रागेव सुमहत् कर्म द्रौणिरेतन्महारथ:।
नाकरोदीदृशं कस्मान्मत्पुत्रविजये धृत:॥ १५२॥
 
 
अनुवाद
राजा धृतराष्ट्र ने पूछा- संजय! अश्वत्थामा ने मेरे पुत्र को विजयी बनाने का दृढ़ निश्चय कर लिया था। फिर उस महारथी ने ऐसा महान पराक्रम पहले क्यों नहीं किया?॥152॥
 
King Dhritarashtra asked- Sanjay! Ashwatthama had firmly decided to make my son victorious. Then why did that great warrior not perform such a great feat earlier?॥ 152॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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