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mahabharat 10.8.148-149h: उस समय अश्वत्थामा को प्रेम करने वाले उन दोनों वीर पुरुषों ने भी उसे यह सुखद समाचार सुनाया कि उन दोनों ने भी हजारों पांचालों और सृंजयों को टुकड़े-टुकड़े कर डाला है।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 148-149h
 
 
श्लोक  10.8.148-149h 
तावथाचख्यतुस्तस्मै प्रियं प्रियकरौ तदा॥ १४८॥
पञ्चालान् सृञ्जयांश्चैव विनिकृत्तान् सहस्रश:।
 
 
अनुवाद
उस समय अश्वत्थामा को प्रेम करने वाले उन दोनों वीर पुरुषों ने भी उसे यह सुखद समाचार सुनाया कि उन दोनों ने भी हजारों पांचालों और सृंजयों को टुकड़े-टुकड़े कर डाला है।
 
At that time those two brave men who loved Ashvatthama also conveyed to him the pleasant news that both of them had also cut into pieces thousands of Panchalas and Srinjayas.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)