श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 147-148h
 
 
श्लोक  10.8.147-148h 
निष्क्रम्य शिबिरात् तस्मात् ताभ्यां संगम्य वीर्यवान्॥ १४७॥
आचख्यौ कर्म तत् सर्वं हृष्ट: संहर्षयन् विभो।
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! उस शिविर से निकलकर बलवान अश्वत्थामा उन दोनों से मिला और स्वयं भी आनन्द में भरकर उन दोनों का आनन्द बढ़ाते हुए उसने उनसे अपना सब कर्म कहा॥147 1/2॥
 
O Lord! Coming out of that camp the powerful Ashvatthama met them both and being himself filled with joy and increasing the joy of both of them he told them all his deeds.॥ 147 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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