Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.8.145-146h: हे मनुष्यों के स्वामी! द्रोणपुत्र ने अपने पिता के कठिन मार्ग का अनुसरण करते हुए अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार कार्य पूरा किया और शोक तथा चिंता से मुक्त हो गया।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 145-146h
 
 
श्लोक  10.8.145-146h 
यथाप्रतिज्ञं तत् कर्म कृत्वा द्रौणायनि: प्रभो॥ १४५॥
दुर्गमां पदवीं गच्छन् पितुरासीद् गतज्वर:।
 
 
अनुवाद
हे मनुष्यों के स्वामी! द्रोणपुत्र ने अपने पिता के कठिन मार्ग का अनुसरण करते हुए अपनी प्रतिज्ञा के अनुसार कार्य पूरा किया और शोक तथा चिंता से मुक्त हो गया।
 
O lord of men! Following the difficult path of his father, Drona's son completed the task as per his promise and became free from sorrow and worry. 145 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)