Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.8.144-145h: जैसे प्रलयकाल में अग्नि सम्पूर्ण प्राणियों को जलाकर फिर प्रकाशित हो जाती है, वैसे ही संहार समाप्त होने पर अश्वत्थामा अपने दुर्गम लक्ष्य पर पहुँचकर और भी अधिक शोभायमान हो गया ॥144 1/2॥ | mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे प्रलयकाल में अग्नि सम्पूर्ण प्राणियों को जलाकर फिर प्रकाशित हो जाती है, वैसे ही संहार समाप्त होने पर अश्वत्थामा अपने दुर्गम लक्ष्य पर पहुँचकर और भी अधिक शोभायमान हो गया ॥144 1/2॥
Just as during the time of destruction, fire burns all the living beings and then becomes bright, similarly after the carnage was over, Ashvatthama became more beautiful after reaching his inaccessible goal. ॥ 144 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥