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mahabharat 10.8.140: अन्य पेटविहीन राक्षस चर्बी खाते हुए इधर-उधर दौड़ रहे थे। कच्चा मांस खाने वाले उन भयानक राक्षसों के अनेक चेहरे थे। 140.   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  10.8.140 
वसाश्चैवापरे पीत्वा पर्यधावन् विकुक्षिका:।
नानावक्त्रास्तथा रौद्रा: क्रव्यादा: पिशिताशना:॥ १४०॥
 
 
अनुवाद
अन्य पेटविहीन राक्षस चर्बी खाते हुए इधर-उधर दौड़ रहे थे। कच्चा मांस खाने वाले उन भयानक राक्षसों के अनेक चेहरे थे। 140.
 
The other stomachless demons were running around eating fats. Those horrific demons eating raw meat had many faces. 140.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)