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mahabharat 10.8.139: मांसभक्षी राक्षस और हिंसक पशु, जिनका आहार विशेष रूप से चर्बी, मज्जा, अस्थि, रक्त और चिकनाई था, वे दूसरों का मांस खा रहे थे ॥139॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 139
 
 
श्लोक  10.8.139 
मेदोमज्जास्थिरक्तानां वसानां च भृशाशिता:।
परमांसानि खादन्त: क्रव्यादा मांसजीविन:॥ १३९॥
 
 
अनुवाद
मांसभक्षी राक्षस और हिंसक पशु, जिनका आहार विशेष रूप से चर्बी, मज्जा, अस्थि, रक्त और चिकनाई था, वे दूसरों का मांस खा रहे थे ॥139॥
 
Carnivorous demons and ferocious animals, who had a special diet of fat, marrow, bones, blood and grease, were eating the flesh of others.॥ 139॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)