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श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  10.8.134 
तत्रादृश्यन्त रक्षांसि पिशाचाश्च पृथग्विधा:।
खादन्तो नरमांसानि पिबन्त: शोणितानि च॥ १३४॥
 
 
अनुवाद
वहाँ अनेक प्रकार के राक्षस और पिशाच मनुष्यों का मांस खाते और उनका रक्त पीते दिखाई दिए।
 
There, many demons and vampires of various shapes were seen eating the flesh of humans and drinking their blood. 134.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)