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mahabharat 10.8.133: वह भयंकर रात्रि रात्रिचर प्राणियों के लिए आनन्ददायी थी, तथा मनुष्यों, घोड़ों और हाथियों के लिए अत्यन्त विनाशकारी सिद्ध हुई।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 133
 
 
श्लोक  10.8.133 
निशाचराणां सत्त्वानां रात्रि: सा हर्षवर्धिनी।
आसीन्नरगजाश्वानां रौद्री क्षयकरी भृशम्॥ १३३॥
 
 
अनुवाद
वह भयंकर रात्रि रात्रिचर प्राणियों के लिए आनन्ददायी थी, तथा मनुष्यों, घोड़ों और हाथियों के लिए अत्यन्त विनाशकारी सिद्ध हुई।
 
That dreadful night was a delight to the nocturnal creatures and proved extremely destructive for men, horses and elephants. 133.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)