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mahabharat 10.8.129: जैसे प्रलयकाल में क्रोधी पशुपति रुद्र सम्पूर्ण पशुओं का संहार कर देते हैं, वैसे ही कुपित अश्वत्थामा ने सहस्रों मनुष्यों को मार डाला जो किसी प्रकार प्राण बचाने का प्रयत्न कर रहे थे और पूर्णतया भयभीत हो गए थे तथा उनका सारा उत्साह नष्ट हो गया था॥129॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 129
 
 
श्लोक  10.8.129 
स चेष्टमानानुद्विग्नान् निरुत्साहान् सहस्रश:।
न्यपातयन्नरान् क्रुद्ध: पशून् पशुपतिर्यथा॥ १२९॥
 
 
अनुवाद
जैसे प्रलयकाल में क्रोधी पशुपति रुद्र सम्पूर्ण पशुओं का संहार कर देते हैं, वैसे ही कुपित अश्वत्थामा ने सहस्रों मनुष्यों को मार डाला जो किसी प्रकार प्राण बचाने का प्रयत्न कर रहे थे और पूर्णतया भयभीत हो गए थे तथा उनका सारा उत्साह नष्ट हो गया था॥129॥
 
Just as at the time of dissolution, the wrathful Pashupati Rudra kills all the animals, similarly the enraged Ashvatthama killed thousands of human beings who were trying to save their lives in some way or the other and were completely frightened and had lost all enthusiasm.॥ 129॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)