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mahabharat 10.8.128: हे राजन्! वह भयंकर धूल रक्त से भीगी हुई पृथ्वी पर गिरकर क्षण भर में लुप्त हो गई।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  10.8.128 
शोणितव्यतिषिक्तायां वसुधायां च भूमिप।
तद्रजस्तुमुलं घोरं क्षणेनान्तरधीयत॥ १२८॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्! वह भयंकर धूल रक्त से भीगी हुई पृथ्वी पर गिरकर क्षण भर में लुप्त हो गई।
 
King! That dreadful dust fell on the blood-soaked earth and vanished in a moment. 128.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)