vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 10: सौप्तिक पर्व
»
अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध
»
श्लोक 125
श्लोक
10.8.125
न च सुप्तं प्रमत्तं वा न्यस्तशस्त्रं कृताञ्जलिम्।
धावन्तं मुक्तकेशं वा हन्ति पार्थो धनंजय:॥ १२५॥
अनुवाद
कुन्तीपुत्र अर्जुन सोते हुए, असावधान, निहत्थे, हाथ जोड़े हुए, भागते हुए या केश खोलकर विनय करने वाले पुरुष को कभी नहीं मारता ॥125॥
Kunti's son Arjun never kills a man who is asleep, careless, unarmed, with folded hands, fleeing or showing humility by opening his hair.॥ 125॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd