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mahabharat 10.8.125: कुन्तीपुत्र अर्जुन सोते हुए, असावधान, निहत्थे, हाथ जोड़े हुए, भागते हुए या केश खोलकर विनय करने वाले पुरुष को कभी नहीं मारता ॥125॥   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 125
 
 
श्लोक  10.8.125 
न च सुप्तं प्रमत्तं वा न्यस्तशस्त्रं कृताञ्जलिम्।
धावन्तं मुक्तकेशं वा हन्ति पार्थो धनंजय:॥ १२५॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीपुत्र अर्जुन सोते हुए, असावधान, निहत्थे, हाथ जोड़े हुए, भागते हुए या केश खोलकर विनय करने वाले पुरुष को कभी नहीं मारता ॥125॥
 
Kunti's son Arjun never kills a man who is asleep, careless, unarmed, with folded hands, fleeing or showing humility by opening his hair.॥ 125॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)