Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.8.12-14h: भरतनंदन! धृष्टद्युम्न के उस तम्बू में प्रवेश करके द्रोणकुमार ने देखा कि पास ही पांचालराजकुमार एक विशाल शय्या पर, जो बहुमूल्य शय्याओं और रेशमी चादरों से ढकी हुई थी, शयन कर रहे थे। वह शय्या उत्तम मालाओं से सुशोभित थी तथा धूप और चंदन से सुगन्धित थी। | mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भरतनंदन! धृष्टद्युम्न के उस तम्बू में प्रवेश करके द्रोणकुमार ने देखा कि पास ही पांचालराजकुमार एक विशाल शय्या पर, जो बहुमूल्य शय्याओं और रेशमी चादरों से ढकी हुई थी, शयन कर रहे थे। वह शय्या उत्तम मालाओं से सुशोभित थी तथा धूप और चंदन से सुगन्धित थी।
Bharatanandan! Entering that tent of Dhrishtadyumna, Dronakumar saw that the prince of Panchala was sleeping nearby on a huge bed covered with precious beddings and silken sheets. That bed was decorated with the best garlands and was perfumed with incense and sandalwood powder. 12-13 1/2.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥