श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 116-117h
 
 
श्लोक  10.8.116-117h 
पृष्ठच्छिन्नान् पार्श्वच्छिन्नान् शिरश्छिन्नांस्तथा परान्॥ ११६॥
स महात्माकरोद् द्रौणि: कांश्चिच्चापि पराङ्मुखान्।
 
 
अनुवाद
महामनस्वी द्रोणपुत्र ने कितनों की पीठ काट डाली, कितनों की पसलियाँ तोड़ दीं, कितनों के सिर काट डाले और कितनों को भगा दिया ॥116 1/2॥
 
The great-minded son of Drona cut off the backs of some, broke the ribs of some, beheaded some and chased away many. ॥ 116 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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