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mahabharat 10.8.115-116h: भरत! उसने अनेक भुजाओं और सिरों के साथ-साथ उनके शस्त्र और बाजूबंद भी काट डाले। उसने हाथी की सूँड़ के समान दिखने वाली जांघों, हाथों और पैरों को भी टुकड़े-टुकड़े कर डाला।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 115-116h
 
 
श्लोक  10.8.115-116h 
सायुधान् साङ्गदान् बाहून् विचकर्त शिरांसि च॥ ११५॥
हस्तिहस्तोपमानूरून् हस्तान् पादांश्च भारत।
 
 
अनुवाद
भरत! उसने अनेक भुजाओं और सिरों के साथ-साथ उनके शस्त्र और बाजूबंद भी काट डाले। उसने हाथी की सूँड़ के समान दिखने वाली जांघों, हाथों और पैरों को भी टुकड़े-टुकड़े कर डाला।
 
Bharata! He cut off many arms and heads along with their weapons and armlets. He also cut into pieces the thighs, hands and feet which looked like the trunk of an elephant. 115 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)