Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 10.8.110-111h: महाराज! इससे सारा शिविर प्रकाशित हो गया और उस प्रकाश में अपने पिता को प्रसन्न करने वाला अश्वत्थामा कुशल योद्धा की भाँति हाथ में तलवार लेकर निर्भय होकर विचरण करने लगा।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 110-111h
 
 
श्लोक  10.8.110-111h 
तत: प्रकाशे शिबिरे खड्गेन पितृनन्दन:॥ ११०॥
अश्वत्थामा महाराज व्यचरत् कृतहस्तवत्।
 
 
अनुवाद
महाराज! इससे सारा शिविर प्रकाशित हो गया और उस प्रकाश में अपने पिता को प्रसन्न करने वाला अश्वत्थामा कुशल योद्धा की भाँति हाथ में तलवार लेकर निर्भय होकर विचरण करने लगा।
 
Maharaj! The whole camp was illuminated by this and in that light Ashvatthama, who had made his father happy, started moving around fearlessly with a sword in his hand like a skilled warrior. 110 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)