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mahabharat 10.8.107-108: उनके हथियार और कवच गिर चुके थे। वे खुले बालों और हाथ जोड़े, डर के मारे काँपते हुए ज़मीन पर खड़े थे, लेकिन उन दोनों आदमियों ने उनमें से किसी को भी ज़िंदा नहीं छोड़ा। शिविर से निकला कोई भी क्षत्रिय उनके हाथों से ज़िंदा नहीं बच सका।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 107-108
 
 
श्लोक  10.8.107-108 
विस्रस्तयन्त्रकवचान् मुक्तकेशान् कृताञ्जलीन्॥ १०७॥
वेपमानान् क्षितौ भीतान् नैव कांश्चिदमुञ्चताम्।
नामुच्यत तयो: कश्चिन्निष्क्रान्त: शिबराद् बहि:॥ १०८॥
 
 
अनुवाद
उनके हथियार और कवच गिर चुके थे। वे खुले बालों और हाथ जोड़े, डर के मारे काँपते हुए ज़मीन पर खड़े थे, लेकिन उन दोनों आदमियों ने उनमें से किसी को भी ज़िंदा नहीं छोड़ा। शिविर से निकला कोई भी क्षत्रिय उनके हाथों से ज़िंदा नहीं बच सका।
 
Their equipment and armour had fallen off. They were standing on the ground, with open hair and folded hands, trembling in fear, but those two men did not leave any of them alive. No Kshatriya who had come out of the camp could escape alive from their hands.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)