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mahabharat 10.8.103-104: लोग अपने-अपने सगे-संबंधियों को छोड़कर चारों दिशाओं में दौड़ रहे थे और एक-दूसरे को योद्धाओं के नाम और कुल पुकार रहे थे। कई लोग चीखते हुए ज़मीन पर गिर पड़े।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 103-104
 
 
श्लोक  10.8.103-104 
पलायतां दिशस्तेषां स्वानप्युत्सृज्य बान्धवान्॥ १०३॥
गोत्रनामभिरन्योन्यमाक्रन्दन्त ततो जना:।
हाहाकारं च कुर्वाणा: पृथिव्यां शेरते परे॥ १०४॥
 
 
अनुवाद
लोग अपने-अपने सगे-संबंधियों को छोड़कर चारों दिशाओं में दौड़ रहे थे और एक-दूसरे को योद्धाओं के नाम और कुल पुकार रहे थे। कई लोग चीखते हुए ज़मीन पर गिर पड़े।
 
Leaving their own relatives behind, people were running in all directions and calling out the names and clans of the warriors to each other. Many people fell on the ground screaming.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)