श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 101-102h
 
 
श्लोक  10.8.101-102h 
त्यक्त्वा द्वाराणि च द्वा:स्थास्तथा गुल्मानि गौल्मिका:॥ १०१॥
प्राद्रवन्त यथाशक्ति कांदिशीका विचेतस:।
 
 
अनुवाद
द्वारपाल और तम्बुओं की रक्षा करने वाले सैनिक अपने-अपने तम्बुओं को छोड़कर भागने लगे। वे सब-के-सब अपनी सुध-बुध खो बैठे थे और यह भी नहीं जानते थे कि किस दिशा में भागें॥101 1/2॥
 
The gatekeepers guarding the doors and the soldiers guarding the tents left their tents and started running as much as they could. All of them had lost their senses and did not even know in which direction they should run.॥101 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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