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mahabharat 10.8.100-101h: बहुत से लोग गहरी नींद में अचेत पड़े थे और चारों ओर अंधकार छाया हुआ था। वे अचानक उठे और मृत्यु से प्रेरित होकर अपने ही निकटजनों की हत्या करने लगे।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 100-101h
 
 
श्लोक  10.8.100-101h 
विचेतस: सनिद्राश्च तमसा चावृता नरा:॥ १००॥
जग्मु: स्वानेव तत्राथ कालेनैव प्रचोदिता:।
 
 
अनुवाद
बहुत से लोग गहरी नींद में अचेत पड़े थे और चारों ओर अंधकार छाया हुआ था। वे अचानक उठे और मृत्यु से प्रेरित होकर अपने ही निकटजनों की हत्या करने लगे।
 
Many people were lying unconscious in deep sleep and were surrounded by darkness. They suddenly got up and were inspired by death and started killing their own close ones. 100 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)