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mahabharat 10.8.10-11h: वह पराक्रमी योद्धा शिविर के हर कोने से परिचित था और इसलिए वह धीरे-धीरे धृष्टद्युम्न के शिविर में पहुंच गया।   |   mahabharat अध्याय 10.8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 8: अश्वत्थामाके द्वारा रात्रिमें सोये हुए पांचाल आदि समस्त वीरोंका संहार तथा फाटकसे निकलकर भागते हुए योद्धाओंका कृतवर्मा और कृपाचार्य द्वारा वध  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  10.8.10-11h 
स प्रविश्य महाबाहुरुद्देशज्ञश्च तस्य ह॥ १०॥
धृष्टद्युम्नस्य निलयं शनकैरभ्युपागमत्।
 
 
अनुवाद
वह पराक्रमी योद्धा शिविर के हर कोने से परिचित था और इसलिए वह धीरे-धीरे धृष्टद्युम्न के शिविर में पहुंच गया।
 
That mighty warrior knew every corner of the camp and so he slowly reached Dhrishtadyumna's camp.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)