तमदृश्यानि भूतानि रक्षांसि च समाद्रवन्।
अभित: शत्रुशिबिरं यान्तं साक्षादिवेश्वरम्॥ ६८॥
अनुवाद
स्वयं महादेवजी के समान अनेक अदृश्य भूत-प्रेत भी शत्रु शिविर की ओर जाते हुए अश्वत्थामा के साथ दौड़े ॥68॥
Like Mahadevji himself, many invisible ghosts and demons also ran along with Ashwatthama while going towards the enemy camp. 68॥
इति श्रीमहाभारते सौप्तिकपर्वणि द्रौणिकृतशिवार्चने सप्तमोऽध्याय:॥ ७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत सौप्तिकपर्वमें द्रोणपुत्रद्वारा की हुई भगवान् शिवकी पूजाविषयक सातवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥