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mahabharat 10.7.66: महाबुद्धिमान अश्वत्थामा से ऐसा कहकर भगवान शिव ने अपने स्वरूप से उसके शरीर में प्रवेश किया और उसे एक स्वच्छ एवं उत्तम तलवार दी।   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  10.7.66 
एवमुक्त्वा महात्मानं भगवानात्मनस्तनुम्।
आविवेश ददौ चास्मै विमलं खड्गमुत्तमम्॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
महाबुद्धिमान अश्वत्थामा से ऐसा कहकर भगवान शिव ने अपने स्वरूप से उसके शरीर में प्रवेश किया और उसे एक स्वच्छ एवं उत्तम तलवार दी।
 
Having said this to the great-minded Ashwatthama, Lord Shiva entered his body in his own form and gave him a clean and excellent sword.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)