श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 64
 
 
श्लोक  10.7.64 
कुर्वता तात सम्मानं त्वां च जिज्ञासता मया।
पञ्चाला: सहसा गुप्ता मायाश्च बहुश: कृता:॥ ६४॥
 
 
अनुवाद
पिताश्री! उनका सम्मान करने तथा आपकी परीक्षा लेने के लिए मैंने अचानक ही पांचालों की रक्षा की है तथा बार-बार माया का प्रयोग किया है।
 
Father! To honour them and to test you, I have suddenly protected the Panchalas and have repeatedly used illusions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)