सत्यशौचार्जवत्यागैस्तपसा नियमेन च।
क्षान्त्या भक्त्या च धृत्या च बुद्धॺा च वचसा तथा॥ ६२॥
यथावदहमाराद्ध: कृष्णेनाक्लिष्टकर्मणा।
तस्मादिष्टतम: कृष्णादन्यो मम न विद्यते॥ ६३॥
अनुवाद
बिना किसी प्रयास के महान् कर्म करने वाले श्रीकृष्ण ने सत्य, शौच, सरलता, त्याग, तप, नियम, क्षमा, भक्ति, धैर्य, बुद्धि और वाणी के द्वारा मेरी यथोचित पूजा की है; इसलिए श्रीकृष्ण से बढ़कर मुझे कोई प्रिय नहीं है॥62-63॥
Shri Krishna, who does great deeds without any effort, has worshiped me appropriately through truth, cleanliness, simplicity, renunciation, penance, rules, forgiveness, devotion, patience, intelligence and speech; Therefore, there is no one more dear to me than Shri Krishna. 62-63॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥