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mahabharat 10.7.58: हे प्रभु! समस्त प्राणी आपमें स्थित हैं और आप समस्त प्राणियों में स्थित हैं। मुख्य गुण आपमें ही संयुक्त हैं ॥58॥   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  10.7.58 
त्वयि सर्वाणि भूतानि सर्वभूतेषु चासि वै।
गुणानां हि प्रधानानामेकत्वं त्वयि तिष्ठति॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! समस्त प्राणी आपमें स्थित हैं और आप समस्त प्राणियों में स्थित हैं। मुख्य गुण आपमें ही संयुक्त हैं ॥58॥
 
Prabhu! All beings are situated in you and you are situated in all beings. The main qualities are united in you only. ॥ 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)