Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.7.55: अश्वत्थामा ने भयंकर कर्म करने वाले तथा अपने भयंकर कर्मों के द्वारा कभी भी अपना तेज न खोने वाले महात्मा रुद्रदेव की स्तुति करके हाथ जोड़कर इस प्रकार कहा। | mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अश्वत्थामा ने भयंकर कर्म करने वाले तथा अपने भयंकर कर्मों के द्वारा कभी भी अपना तेज न खोने वाले महात्मा रुद्रदेव की स्तुति करके हाथ जोड़कर इस प्रकार कहा।
Ashwatthama, after praising Mahatma Rudradev, who performed terrible deeds and never lost his glory, through his fierce deeds, folded his hands and said thus.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥