vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 10: सौप्तिक पर्व
»
अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना
»
श्लोक 54
श्लोक
10.7.54
तत: सौम्येन मन्त्रेण द्रोणपुत्र: प्रतापवान्।
उपहारं महामन्युरथात्मानमुपाहरत्॥ ५४॥
अनुवाद
तब अत्यंत क्रोधी और पराक्रमी द्रोणपुत्र ने सोमदेवता से संबंधित मंत्र का जाप करके अपना शरीर दान में दे दिया ॥54॥
Then the very wrathful and mighty son of Drona, by chanting the mantra associated with the god Soma, offered his own body as a gift. ॥ 54॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×