श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 53
 
 
श्लोक  10.7.53 
धनूंषि समिधस्तत्र पवित्राणि शिता: शरा:।
हविरात्मवतश्चात्मा तस्मिन् भारत कर्मणि॥ ५३॥
 
 
अनुवाद
उस आत्म-समर्पणरूपी यज्ञ में आत्मबल से परिपूर्ण अश्वत्थामा का धनुष समिधा के रूप में प्रकट हुआ, तीक्ष्ण बाण कुश के रूप में प्रकट हुए और शरीर ही हविष्य के रूप में प्रकट हुआ ॥53॥
 
India In that sacrificial act of self-surrender, the bow of Ashwatthama, full of self-power, appeared in the form of Samidha, the sharp arrows appeared in the form of Kusha and the body itself appeared in the form of Havishya. 53॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)