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mahabharat 10.7.47-48h: भगवान शिव के वे गण नाना प्रकार के वाद्य बजाते, हंसते, गर्जते, ललकारते और गर्जना आदि करते हुए सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को भयभीत करते हुए अश्वत्थामा के पास आये।   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 47-48h
 
 
श्लोक  10.7.47-48h 
नानावादित्रहसितक्ष्वेडितोत्क्रुष्टगर्जितै:॥ ४७॥
संत्रासयन्तस्ते विश्वमश्वत्थामानमभ्ययु:।
 
 
अनुवाद
भगवान शिव के वे गण नाना प्रकार के वाद्य बजाते, हंसते, गर्जते, ललकारते और गर्जना आदि करते हुए सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को भयभीत करते हुए अश्वत्थामा के पास आये।
 
Those attendants of Lord Shiva came to Ashwatthama, frightening the entire universe by playing various kinds of musical instruments, laughing, roaring, challenging and roaring etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)