Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.7.46-47h: महाभूत भगवान शिव के आत्मरूप हैं। उनके और देवी पार्वती के साथ, भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी महेश्वर भी यज्ञ में भाग लेते हैं। | mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यैरात्मभूतैर्भगवान् पार्वत्या च महेश्वर:॥ ४६॥
महाभूतगणैर्भुङ्क्ते भूतभव्यभवत्प्रभु:।
अनुवाद
महाभूत भगवान शिव के आत्मरूप हैं। उनके और देवी पार्वती के साथ, भूत, वर्तमान और भविष्य के स्वामी महेश्वर भी यज्ञ में भाग लेते हैं।
The great elements are the soul forms of Lord Shiva. Along with him and Goddess Parvati, Maheshwar, the lord of the past, present and future, takes part in the yagya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥