Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 10.7.44: भगवान शिव सदैव उन भक्तों की देखभाल करते थे जो मन, वाणी और कर्म से उनके प्रति समर्पित रहते थे। उनके कई गण रक्त और चर्बी पीकर जीवनयापन करते थे। वे ब्रह्म-द्रोह करने वालों पर सदैव क्रोधित रहते थे। 44. | mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना । mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भगवान शिव सदैव उन भक्तों की देखभाल करते थे जो मन, वाणी और कर्म से उनके प्रति समर्पित रहते थे। उनके कई गण रक्त और चर्बी पीकर जीवनयापन करते थे। वे ब्रह्म-द्रोह करने वालों पर सदैव क्रोधित रहते थे। 44.
Lord Shiva always looked after those devotees who were devoted to him in their mind, speech and deeds like his own sons. Many of his associates lived by drinking blood and fat. He always showed anger on those who betrayed Brahman. 44.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥