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पद्मोत्पलापीडधरास्तथा मुकुटधारिण:।
माहात्म्येन च संयुक्ता: शतशोऽथ सहस्रश:॥ २७॥
अनुवाद
कुछ लोगों के सिर पर कमल और कुमुद के मुकुट थे। बहुत से लोग शुद्ध मुकुट धारण किए हुए थे। वे भूतगण सैकड़ों और हजारों की संख्या में थे और सभी अद्भुत तेज से संपन्न थे।
Some wore crowns of lotuses and lilies on their heads. Many wore pure crowns. Those Bhutagans were in hundreds and thousands and all were endowed with wonderful glory.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥