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mahabharat 10.7.19-20: इसी प्रकार अनेक गणों के मुख कछुए के समान थे, नाक, सर्प, बड़े मगरमच्छ, तिमि नामक मछली, मोर, कुरर, कबूतर, हाथी, तोता और मद्गु नामक जलपक्षी थे॥19-20॥   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  10.7.19-20 
कूर्मनक्रमुखाश्चैव शिशुमारमुखास्तथा।
महामकरवक्त्राश्च तिमिवक्त्रास्तथैव च॥ १९॥
हरिवक्त्रा: क्रौञ्चमुखा: कपोतेभमुखास्तथा।
पारावतमुखाश्चैव मद्‍गुवक्त्रास्तथैव च॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार अनेक गणों के मुख कछुए के समान थे, नाक, सर्प, बड़े मगरमच्छ, तिमि नामक मछली, मोर, कुरर, कबूतर, हाथी, तोता और मद्गु नामक जलपक्षी थे॥19-20॥
 
Similarly, several Ganas had faces like those of tortoises, noses, snakes, large crocodiles, a fish called Timi, a peacock, a crane (Kurar), a pigeon, an elephant, a parrot and a water bird called Madgu.॥ 19-20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)