श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 16-18
 
 
श्लोक  10.7.16-18 
श्ववराहोष्ट्ररूपाश्च हयगोमायुगोमुखा:॥ १६॥
ऋक्षमार्जारवदना व्याघ्रद्वीपिमुखास्तथा।
काकवक्त्रा: प्लवमुखा: शुकवक्त्रास्तथैव च॥ १७॥
महाजगरवक्त्राश्च हंसवक्त्रा: सितप्रभा:।
दार्वाघाटमुखाश्चापि चाषवक्त्राश्च भारत॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उनके रूप कुत्ते, सूअर और ऊँट जैसे थे; उनके मुख घोड़ों, सियारों, गायों और बैलों जैसे थे। किसी के मुख भालू जैसे थे, तो किसी के बिल्ली जैसे। किसी के मुख बाघ जैसे थे, तो किसी के चीते जैसे। कुछ गणों के मुख कौओं, बंदरों, तोतों, बड़े अजगरों और हंसों जैसे थे। भरत! कुछ हंसों जैसे श्वेत वर्ण वाले थे, तो किसी के कठफोड़वा और नीलकंठ जैसे थे। 16-18।
 
Their forms were like those of dogs, pigs and camels; their faces looked like those of horses, jackals and cows and bulls. Some had faces like bears and some like cats. Some had faces like tigers and some like leopards. Some of the Ganas had faces like crows, monkeys, parrots, big pythons and swans. Bhaarat! Some had white complexion like swans, some had faces like woodpecker and blue jay. 16-18.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)