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mahabharat 10.7.14: महाराज! उस वेदी पर अग्निदेव तुरन्त प्रकट हुए और उन्होंने समस्त दिशाओं तथा आकाश को अपनी ज्वालाओं से भर दिया।   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.7.14 
तस्यां वेद्यां तदा राजंश्चित्रभानुरजायत।
स दिशो विदिश: खं च ज्वालाभिरिव पूरयन्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उस वेदी पर अग्निदेव तुरन्त प्रकट हुए और उन्होंने समस्त दिशाओं तथा आकाश को अपनी ज्वालाओं से भर दिया।
 
King! On that altar the god Agni immediately appeared, filling all directions and the sky with his flames.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)