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mahabharat 10.7.13: इस प्रकार अश्वत्थामा का निश्चय जानकर उसके पुण्यकर्मों के कारण उस महामनस्वी वीर के सामने एक सुवर्णमयी वेदी प्रकट हो गई ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  10.7.13 
इति तस्य व्यवसितं ज्ञात्वा योगात् सुकर्मण:।
पुरस्तात् काञ्चनी वेदी प्रादुरासीन्महात्मन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अश्वत्थामा का निश्चय जानकर उसके पुण्यकर्मों के कारण उस महामनस्वी वीर के सामने एक सुवर्णमयी वेदी प्रकट हो गई ॥13॥
 
Thus, knowing the determination of Ashwatthama, due to his good deeds, a golden altar appeared in front of that great minded hero. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)