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mahabharat 10.7.12: यदि मैं आज इस अत्यंत कठिन और भयंकर विपत्ति पर विजय प्राप्त कर सकूँ, तो मैं परम पवित्र परमेश्वर आपको ही इस संसार के समस्त पुण्य दान अर्पित कर दूँगा ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 10.7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 7: अश्वत्थामाद्वारा शिवकी स्तुति, उसके सामने एक अग्निवेदी तथा भूतगणोंका प्राकट्य और उसका आत्मसमर्पण करके भगवान् शिवसे खड्ग प्राप्त करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.7.12 
इमां चेदापदं घोरां तराम्यद्य सुदुष्कराम्।
सर्वभूतोपहारेण यक्ष्येऽहं शुचिना शुचिम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
यदि मैं आज इस अत्यंत कठिन और भयंकर विपत्ति पर विजय प्राप्त कर सकूँ, तो मैं परम पवित्र परमेश्वर आपको ही इस संसार के समस्त पुण्य दान अर्पित कर दूँगा ॥12॥
 
If I can overcome this extremely difficult and dreadful calamity today, then I will offer all the holy gifts of existence to You, the Most Holy Supreme Lord. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)