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श्लोक 10.6.9  |
तथा तेजोमरीचिभ्य: शङ्खचक्रगदाधरा:।
प्रादुरासन् हृषीकेशा: शतशोऽथ सहस्रश:॥ ९॥ |
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| अनुवाद |
| उसके तेज से शंख, चक्र और गदा धारण किये हुए सैकड़ों-हजारों विष्णु प्रकट हो रहे थे। |
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| From the rays of its brilliance, hundreds and thousands of Vishnus holding conch, discus and mace were appearing. |
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