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mahabharat 10.6.27-28h: "यदि कोई मनुष्य किसी कार्य को आरम्भ करने के पश्चात् भय के कारण उसे छोड़ देता है, तो बुद्धिमान् मनुष्य कहता है कि उस कार्य को करने का उसका संकल्प अज्ञानता या मूर्खता है। 27 1/2   |   mahabharat अध्याय 10.6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना   ।   mahabharat पर्व 10: सौप्तिक पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  10.6.27-28h 
प्रतिज्ञानं ह्यविज्ञानं प्रवदन्ति मनीषिण:॥ २७॥
यदारभ्य क्रियां काञ्चिद् भयादिह निवर्तते।
 
 
अनुवाद
"यदि कोई मनुष्य किसी कार्य को आरम्भ करने के पश्चात् भय के कारण उसे छोड़ देता है, तो बुद्धिमान् मनुष्य कहता है कि उस कार्य को करने का उसका संकल्प अज्ञानता या मूर्खता है। 27 1/2
 
"If a man, after starting a task, abandons it out of fear, a wise man says that his resolve to do that task is ignorance or foolishness. 27 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)