गोब्राह्मणनृपस्त्रीषु सख्युर्मातुर्गुरोस्तथा॥ २१॥
हीनप्राणजडान्धेषु सुप्तभीतोत्थितेषु च।
मत्तोन्मत्तप्रमत्तेषु न शस्त्राणि च पातयेत्॥ २२॥
अनुवाद
‘मनुष्य को चाहिए कि वह गौ, ब्राह्मण, राजा, स्त्री, मित्र, माता, गुरु, दुर्बल, जड़, अंधे, सोए हुए, भयभीत, मतवाले, पागल और असावधान पर शस्त्र का प्रयोग न करे।॥ 21-22॥
‘A man should not use weapons against a cow, a Brahmin, a king, a woman, a friend, a mother, a teacher, the weak, the inanimate, the blind, the sleeping, the frightened, the inebriated, the mad and the careless.॥ 21-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥