श्री महाभारत  »  पर्व 10: सौप्तिक पर्व  »  अध्याय 6: अश्वत्थामाका शिविर-द्वारपर एक अद्भुत पुरुषको देखकर उसपर अस्त्रोंका प्रहार करना और अस्त्रोंके अभावमें चिन्तित हो भगवान् शिवकी शरणमें जाना  »  श्लोक 21-22
 
 
श्लोक  10.6.21-22 
गोब्राह्मणनृपस्त्रीषु सख्युर्मातुर्गुरोस्तथा॥ २१॥
हीनप्राणजडान्धेषु सुप्तभीतोत्थितेषु च।
मत्तोन्मत्तप्रमत्तेषु न शस्त्राणि च पातयेत्॥ २२॥
 
 
अनुवाद
‘मनुष्य को चाहिए कि वह गौ, ब्राह्मण, राजा, स्त्री, मित्र, माता, गुरु, दुर्बल, जड़, अंधे, सोए हुए, भयभीत, मतवाले, पागल और असावधान पर शस्त्र का प्रयोग न करे।॥ 21-22॥
 
‘A man should not use weapons against a cow, a Brahmin, a king, a woman, a friend, a mother, a teacher, the weak, the inanimate, the blind, the sleeping, the frightened, the inebriated, the mad and the careless.॥ 21-22॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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